Yadi Mai Sipahi Hota Nibandh: मेरे प्यारे दोस्तों, यदि मैं सैनिक होता तो निबंध लिखते समय मेरे मन में बहुत खुशी और गर्व का भाव आता। कल्पना करो, मैं छोटा सा बच्चा हूँ, स्कूल जाता हूँ, घर पर माँ-बाप के साथ खेलता हूँ, और अचानक सोचता हूँ – काश! मैं सैनिक बन जाऊँ। हरे-भरे खेतों के बीच, नीले आसमान के नीचे, मैं खड़ा होता, कंधे पर तिरंगा लहराता और पूरे देश की सेवा करता। यह सिर्फ सपना नहीं, बल्कि मेरे छोटे-छोटे दिल की बहुत बड़ी इच्छा है।
सबसे पहले तो मैं रोज सुबह बहुत जल्दी उठ जाता। अभी स्कूल में भी हम दस बजे तक पहुँचते हैं, पर सैनिक तो सूरज से पहले उठता है। याद है, एक दिन मैं स्कूल के लिए देर से निकला था। माँ ने कहा था, “बेटा, समय का पालन करो, वरना सब कुछ छूट जाता है।” अगर मैं सैनिक होता तो यह बात मुझे और भी मजबूत बना देती। मैं अपनी चमकती वर्दी पहनता, जूते पॉलिश करता और सीधा खड़ा होकर देश के लिए तैयार होता। मेरे दोस्त राहुल और प्रिया भी मेरे साथ होते। हम तीनों साथ-साथ दौड़ते, व्यायाम करते और हँसते। स्कूल के खेल के मैदान में हम “आर्मी-आर्मी” खेलते थे, अब असली सैनिक बनकर वही खेल सच्चा हो जाता।
फिर मैं देश की सेवा करता। पर सेवा का मतलब सिर्फ एक जगह खड़े रहना नहीं। जैसे हमारे गाँव में पिछले साल भारी बारिश हुई थी। सड़कें पानी से भर गईं थीं। लोग डर गए थे। उस समय अगर मैं सैनिक होता तो नाव लेकर बच्चों को स्कूल पहुँचाता, बूढ़े दादा-दादी को सुरक्षित जगह ले जाता और खाना बाँटता। दादी जी अक्सर कहती हैं, “सैनिक भगवान का रूप होते हैं। वे कभी थकते नहीं, हमेशा दूसरों का ख्याल रखते हैं।” उनकी बात सुनकर मेरे मन में बहुत गर्माहट होती। मैं सोचता, सैनिक होना मतलब सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि प्यार और मदद का भाव है।
स्कूल में जब हम राष्ट्रगान गाते हैं तो मेरी आँखें नम हो जाती हैं। अगर मैं सैनिक होता तो 15 अगस्त के दिन परेड में सबसे आगे चलता। मेरे छोटे भाई-बहन मुझे देखकर ताली बजाते। “वाह! हमारा भैया सैनिक है!” कहकर वे खुश होते। और मैं उन्हें बताता कि देश को मजबूत रखने के लिए हम सबको एक होना चाहिए। घर पर माँ के हाथ का खाना लेकर मैं अपने साथी सैनिकों के साथ बाँटता। ठीक वैसे ही जैसे स्कूल में हम टिफिन शेयर करते हैं। सैनिक भी एक बड़ा परिवार होता है। कोई भी अकेला नहीं रहता। सब एक-दूसरे का साथ देते हैं।
एक बार मैंने अपने नानी जी से सुना था कि जब वे छोटी थीं तब सैनिकों ने उनके गाँव में बाढ़ के समय सबको बचाया था। नानी जी कहती थीं, “वे लोग रात-दिन काम करते रहे, कभी आराम नहीं किया।” उस कहानी को सुनकर मैं सोचता, काश मैं भी वैसा बन सकूँ। अगर मैं सैनिक होता तो स्कूल के बच्चों को भी सिखाता कि छोटी-छोटी बातों में मदद करना कितना अच्छा लगता है। जैसे क्लास में कोई बच्चा गिर जाए तो उसे उठाना, या दोस्त के साथ किताब शेयर करना। ये छोटी आदतें ही हमें असली सैनिक बनाती हैं।
दोस्तों, सैनिक बनना मतलब सिर्फ वर्दी पहनना नहीं। यह तो दिल की बात है। सैनिक देश से बहुत प्यार करता है। वह कभी हार नहीं मानता। मुश्किल समय में भी मुस्कुराता रहता है। मैं भी रोज स्कूल जाते समय यही सोचता हूँ कि चाहे मैं डॉक्टर बनूँ, टीचर बनूँ या किसान, लेकिन अपने देश के लिए कुछ अच्छा काम जरूर करूँगा।
अंत में मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि यदि मैं सैनिक होता तो निबंध खत्म करते समय भी मेरे चेहरे पर मुस्कान होती। क्योंकि सैनिक बनकर मैं न सिर्फ देश की रक्षा करता, बल्कि हर बच्चे के सपनों को भी मजबूत बनाता। तुम भी सोचो न, अगर तुम सैनिक होते तो क्या-क्या करते? अपने स्कूल, घर और देश को और बेहतर बनाने के लिए आज से ही छोटी-छोटी मदद शुरू कर दो। क्योंकि असली सैनिक वही है जो दूसरों का ख्याल रखता है।
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