Yadi Mai Pradhanmantri Hota Nibandh: यदि मैं प्रधानमंत्री होता निबंध

Yadi Mai Pradhanmantri Hota Nibandh: मेरे प्यारे दोस्तों, यदि मैं प्रधानमंत्री होता तो निबंध लिखते समय मेरे दिल में बहुत सारी खुशी और जिम्मेदारी का एहसास होता। सोचो न, मैं अभी छोटा सा बच्चा हूँ, स्कूल जाता हूँ, दोस्तों के साथ खेलता हूँ, घर पर मम्मी-पापा की बातें सुनता हूँ, और अचानक कल्पना करता हूँ – काश! मैं भारत का प्रधानमंत्री बन जाऊँ। लाल बल्ले वाली कुर्सी पर बैठकर, तिरंगे झंडे के सामने खड़े होकर, पूरे देश के लिए अच्छे फैसले लेता। यह सपना देखकर ही मेरी आँखें चमक उठती हैं।

सबसे पहले तो मैं हर सुबह बहुत जल्दी उठता। अभी स्कूल में हम 7 बजे उठते हैं, पर प्रधानमंत्री तो और भी पहले तैयार होता है। याद है, एक दिन मैंने टीवी पर देखा कि प्रधानमंत्री जी सुबह-सुबह काम शुरू कर देते हैं। अगर मैं प्रधानमंत्री होता तो मैं भी ऐसा ही करता। सबसे पहले मैं सोचता कि देश के हर बच्चे को अच्छी पढ़ाई मिले। हमारे गाँव में मेरी एक दोस्त रिया है, जो दूर-दूर स्कूल जाती है। रास्ते में बहुत धूल उड़ती है। मैं कानून बनवाता कि हर गाँव में अच्छी सड़क और बस हो, ताकि बच्चे आसानी से स्कूल पहुँचें। दादा जी कहते हैं, “पढ़ाई से ही देश मजबूत होता है।” उनकी बात मेरे दिल में बस गई है।

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फिर मैं स्वास्थ्य का बहुत ख्याल रखता। पिछले साल मेरे क्लास में सोहन बीमार पड़ गया था। अस्पताल दूर था और दवा महँगी। अगर मैं प्रधानमंत्री होता तो हर गाँव में अच्छा अस्पताल बनवाता। मुफ्त दवा और डॉक्टर हर जगह होते। माँ अक्सर कहती हैं, “स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।” मैं चाहता कि कोई भी बच्चा या बूढ़ा व्यक्ति बीमारी से डरे नहीं। मैं स्कूलों में खेल का मैदान बढ़वाता, ताकि हम रोज खेलें और तंदुरुस्त रहें। मेरे दोस्त अजय को क्रिकेट बहुत पसंद है। वह कहता है, “अगर अच्छे मैदान हों तो हम अच्छे खिलाड़ी बन सकते हैं।” मैं उसे सच करने की कोशिश करता।

देश में गरीबी कम करने के लिए मैं बहुत मेहनत करता। हमारे मोहल्ले में रामू चाचा रिक्शा चलाते हैं। वे बहुत मेहनत करते हैं पर कमाई कम होती है। अगर मैं प्रधानमंत्री होता तो छोटे-छोटे काम करने वालों को मदद देता। जैसे सस्ते लोन, अच्छी ट्रेनिंग और बाजार में उनकी चीजें बेचने की जगह। दादी जी बताती हैं कि पुराने समय में गाँव वाले मिल-जुलकर काम करते थे। मैं भी सबको एक साथ लाता। अमीर-गरीब सब मिलकर देश बनाएँ। कोई भूखा न सोए, यह मेरा सबसे बड़ा सपना होता।

स्कूल में जब हम 26 जनवरी को परेड देखते हैं तो मुझे गर्व होता है। अगर मैं प्रधानमंत्री होता तो 15 अगस्त और 26 जनवरी पर बच्चों को बुलाता। हम साथ में तिरंगा लहराते, गीत गाते और देश के बारे में बातें करते। मैं बच्चों से पूछता, “तुम क्या बदलाव चाहते हो?” क्योंकि देश सबका है। मेरे दोस्त प्रिया कहती है, “पेड़ ज्यादा लगाओ, प्रदूषण कम करो।” मैं उसके विचार को लागू करता। ज्यादा पेड़ लगवाता, नदियाँ साफ करवाता। हरा-भरा भारत बनाता।

एक बार मैंने नानी से सुना कि जब वे छोटी थीं तब बिजली नहीं होती थी। अब भी कुछ जगहों पर लाइट नहीं आती। अगर मैं प्रधानमंत्री होता तो सूरज की रोशनी से बिजली बनवाता। हर घर में रोशनी हो। बच्चे रात को भी पढ़ सकें।

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दोस्तों, प्रधानमंत्री होना मतलब सिर्फ बड़ा पद नहीं। यह तो दिल से सेवा करने की बात है। मैं कभी झूठ नहीं बोलता, हमेशा सच के साथ रहता। मुश्किल समय में भी हिम्मत नहीं हारता। जैसे स्कूल में परीक्षा के समय हम डरते हैं पर फिर पढ़कर पास हो जाते हैं, वैसे ही देश की मुश्किलें सुलझाता।

अंत में मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि यदि मैं प्रधानमंत्री होता तो निबंध खत्म करते समय भी मुस्कुराता। क्योंकि मैं देश को और बेहतर, खुशहाल और मजबूत बनाता। लेकिन सच कहूँ, प्रधानमंत्री कोई भी बन सकता है अगर वह अच्छा इंसान बने। तुम भी सोचो न – आज से ही स्कूल में साफ-सफाई रखो, दोस्तों की मदद करो, पढ़ाई में मेहनत करो। छोटे-छोटे काम से ही बड़ा बदलाव आता है। हम सब मिलकर भारत को सपनों का देश बनाएँ।

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