Yadi Mai Rashtrapati Hota Nibandh: यदि मैं देश का राष्ट्रपति होता निबंध

Yadi Mai Rashtrapati Hota Nibandh: नमस्ते दोस्तों! आज स्कूल में निबंध लिखते समय मैं सोचने लगा – यदि मैं देश का राष्ट्रपति होता तो? बस यही सोचकर मेरा मन खुश हो जाता है। लगता है जैसे पूरा देश मेरा अपना घर हो। मैं छोटा सा बच्चा हूँ, लेकिन राष्ट्रपति बनकर देश को और अच्छा बना सकता हूँ। मेरे दादाजी कहते हैं, “बच्चा, सपने देखो तो बड़े देखो।” तो मैं भी बड़ा सपना देख रहा हूँ। यदि मैं देश का राष्ट्रपति होता तो सबसे पहले हर बच्चे का चेहरा हँसता देखना चाहता।

स्कूल जाते समय मैं रोज़ सड़क पर कुछ बच्चे देखता हूँ जो किताब-कॉपी लिए बिना स्कूल नहीं जा पाते। उनके माता-पिता को पैसे की कमी होती है। यदि मैं राष्ट्रपति होता तो सबके लिए मुफ्त स्कूल बनवाता। हर गाँव और शहर में नया स्कूल, जहाँ खेल का मैदान भी हो। याद है, पिछले साल मेरा दोस्त राहुल बीमार हो गया था। वह स्कूल नहीं आ सका क्योंकि उसके घर में पैसे नहीं थे। मैं उसे अपनी किताबें देता था। राष्ट्रपति बनकर मैं ऐसे सभी बच्चों को किताबें, बैग और यूनिफॉर्म फ्री देता। स्कूल में टीचर भी कहते, “पढ़ो बच्चो, देश का भविष्य तुम हो।” मैं चाहता कि हर बच्चा पढ़े और बड़े होकर डॉक्टर, टीचर या इंजीनियर बने।

दूसरी बात, मैं गरीबों की मदद करना चाहता। घर पर माँ रसोई में खाना बनाती हैं तो कभी-कभी मैं सोचता हूँ – कितने लोग भूखे सोते होंगे। मेरे दादाजी बचपन में बताते थे कि स्वतंत्रता के समय कितनी मुश्किलें थीं। लेकिन अब हम आजाद हैं। यदि मैं राष्ट्रपति होता तो हर गाँव में अच्छे घर बनवाता। जहाँ बिजली, पानी और शौचालय सब हो। एक बार स्कूल के पिकनिक पर हमने एक बूढ़े दादा को देखा जो सड़क किनारे बैठे थे। उनके कपड़े फटे हुए थे। मैंने उन्हें अपना टिफिन दे दिया। वे बहुत खुश हुए। राष्ट्रपति बनकर मैं ऐसे सभी लोगों के लिए राशन और दवाइयाँ मुफ्त करता। कोई भूखा न सोए, यह मेरा वादा होता।

तीसरी बात, मैं पर्यावरण को साफ रखना चाहता। हमारे स्कूल के पीछे एक छोटा सा बगीचा है। हमने मिलकर पौधे लगाए थे। लेकिन शहर में कचरा everywhere बिखरा रहता है। यदि मैं राष्ट्रपति होता तो पूरे देश में पेड़ लगवाता। हर बच्चे को एक पौधा देता, जैसे मेरे दोस्त अंकित ने अपने घर में नीम का पेड़ लगाया था। दादाजी कहते हैं, “पेड़ लगाओ, तो ऑक्सीजन मिलेगा।” मैं स्कूलों में भी कहता कि हर शुक्रवार को पौधा लगाओ। नदियाँ साफ हो जाएँ, हवा ताज़ी हो। एक बार बारिश में हमारी गली में पानी भर गया था। मैंने दोस्तों के साथ मिलकर कचरा साफ किया। राष्ट्रपति बनकर मैं पूरे देश को साफ-सुथरा बनाता।

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चौथी बात, मैं सबको एक-दूसरे से प्यार करना सिखाता। मेरे दोस्तों में हिंदू, मुस्लिम, सिख सब हैं। हम साथ खेलते हैं, साथ खाते हैं। कभी-कभी छोटी-छोटी लड़ाइयाँ हो जाती हैं, लेकिन फिर हम माफ़ी माँग लेते हैं। यदि मैं राष्ट्रपति होता तो टीवी पर कहता, “बच्चो, लड़ो मत, मिलकर खेलो।” देश में शांति हो, सब खुश रहें। दादाजी की कहानी याद आती है – उन्होंने बताया कि कैसे गांधीजी ने अहिंसा से देश को आजाद कराया। मैं भी वैसा ही चाहता। हर त्योहार पर सब मिलकर मनाएँ।

दोस्तों, यदि मैं देश का राष्ट्रपति होता तो ये सब करता। लेकिन सच कहूँ तो राष्ट्रपति बनने की ज़रूरत नहीं। आज से ही मैं छोटे-छोटे काम कर सकता हूँ। स्कूल में दोस्त की मदद करूँ, घर में माँ की मदद करूँ, पेड़ लगाऊँ और सबके साथ प्यार से रहूँ। देश को बेहतर बनाने का काम हम सबका है। मेरे मन में एक सपना है – एक दिन हमारा देश सबसे खुशहाल बने। आप भी सोचिए न, यदि आप राष्ट्रपति होते तो क्या करते?

मैं जानता हूँ, सपने सच होते हैं। मेरी तरह आप भी पढ़िए, अच्छे बनिए और देश की मदद कीजिए। भारत मेरा है, भारत आपका है। जय हिंद!

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