Pustakalaya Ka Mahatva Nibandh in Hindi: दोस्तों, क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटी-सी इमारत में इतना बड़ा खजाना छिपा हो सकता है? मैं जब पहली बार अपनी स्कूल की लाइब्रेरी में गया था, तो मुझे लगा जैसे मैं किसी जादुई दुनिया में पहुंच गया हूं। चारों तरफ रंग-बिरंगी किताबें, उनकी मीठी खुशबू और शांत माहौल… वाह! आज मैं आपसे पुस्तकालय के महत्व के बारे में बात करना चाहता हूं। पुस्तकालय सिर्फ किताबों का घर नहीं, बल्कि हमारे सपनों, सीखने और खुश रहने का सबसे अच्छा दोस्त है।
पुस्तकालय में हर तरह की किताबें मिलती हैं – कहानियां, विज्ञान, इतिहास, खेल, जानवरों और यहां तक कि अंतरिक्ष की भी। सबसे अच्छी बात यह है कि ये सब किताबें हमें बिना पैसे दिए मिल जाती हैं। मैं घर पर अपनी पॉकेट मनी से सिर्फ एक-दो किताबें खरीद पाता हूं, लेकिन पुस्तकालय में मैं सौ-सौ किताबें पढ़ सकता हूं। मेरी छोटी बहन को राजकुमारी वाली कहानियां बहुत पसंद हैं। जब वह पुस्तकालय से नई वाली लाती है, तो पूरा दिन मुस्कुराती रहती है।
एक बार मेरे दोस्त राहुल को स्कूल प्रोजेक्ट में बहुत परेशानी हो रही थी। वह सूरज के बारे में कुछ नहीं जानता था। मैंने उसे पुस्तकालय ले जाकर कहा, “चल, यहां देखते हैं।” हमने एक पतली-सी किताब ढूंढी जिसमें सूरज की तस्वीरें और आसान भाषा में सब कुछ लिखा था। राहुल ने उसे पढ़ा और अपना प्रोजेक्ट इतना अच्छा बनाया कि टीचर ने उसे स्टार दिया। उस दिन मुझे समझ आया कि पुस्तकालय के महत्व को हम कितना कम आंकते हैं। यह हमें बिना स्कूल के भी बहुत कुछ सिखा देता है।
मेरे दादाजी बचपन की बातें करते हुए अक्सर कहते हैं, “बेटा, हमारे समय में पुस्तकालय बहुत कम थे। हम दूर-दूर पैदल चलकर जाते थे। लेकिन आज तुम्हारे पास स्कूल में ही इतनी सुंदर लाइब्रेरी है। इसका फायदा उठाओ।” दादाजी की ये बातें सुनकर मुझे लगता है कि किताबें हमें पुरानी यादों से जोड़ती हैं और नई सीख देती हैं। जब मैं पुस्तकालय में बैठकर ‘पंचतंत्र’ की कहानियां पढ़ता हूं, तो लगता है जैसे कोई नाना-नानी मुझे गोद में बिठाकर कहानी सुना रहे हों।
पुस्तकालय हमें अच्छी आदतें भी सिखाता है। वहां शांति होती है, इसलिए मन एकाग्र हो जाता है। मैं जब कभी गुस्सा या उदास होता हूं, तो पुस्तकालय चला जाता हूं। एक छोटी-सी कहानी पढ़ते ही मेरा मन हल्का हो जाता है। मेरी सहेली प्रिया कहती है, “किताबें हमें सिखाती हैं कि दूसरों की मदद कैसे करें।” सचमुच, जब मैंने ‘ईमानदार लकड़हारा’ वाली कहानी पढ़ी, तो मैंने अपनी छोटी बहन को उसके खिलौने वापस करने में मदद की। पुस्तकालय हमें अच्छा इंसान बनाता है।
पुस्तकालय में सिर्फ पढ़ना ही नहीं, दोस्त भी बनते हैं। वहां कई बच्चे आते हैं जो किताबों से प्यार करते हैं। हम एक-दूसरे को अच्छी किताबें बताते हैं। “अरे, यह वाली पढ़ना, बहुत मजा आएगा!” कहकर हम किताबें शेयर करते हैं। कभी-कभी हम चुपचाप साथ बैठकर पढ़ते हैं और फिर बाहर आकर अपनी पसंदीदा कहानी सुनाते हैं। यह मजा घर पर नहीं आता।
आजकल मोबाइल और टीवी बहुत ज्यादा इस्तेमाल होते हैं। लेकिन पुस्तकालय हमें असली खुशी देता है। किताब पढ़ने से हमारी कल्पना शक्ति बढ़ती है। हम उड़ सकते हैं, समुद्र में तैर सकते हैं, या जंगल में घूम सकते हैं – सब कुछ किताबों के जरिए। मैंने एक किताब में पढ़ा था कि एक छोटा सा लड़का अपनी मेहनत से बड़ा वैज्ञानिक बन गया। उस कहानी ने मुझे भी मेहनत करने का जज्बा दिया।
दोस्तों, पुस्तकालय के महत्व को समझकर हमें रोज थोड़ा-थोड़ा समय जरूर निकालना चाहिए। स्कूल की छुट्टी के बाद, रविवार को या शाम को – जब भी समय मिले, पुस्तकालय जाओ। एक किताब उठाओ, आराम से बैठो और पढ़ो। देखोगे, तुम्हारा मन कितना तरोताजा हो जाएगा।
पुस्तकालय हमें बताता है कि असली दौलत ज्ञान है। यह हमें स्मार्ट, दयालु और खुश रखता है। अगर हम सब बच्चे पुस्तकालय का इस्तेमाल करेंगे, तो हमारा देश और हमारा भविष्य बहुत सुंदर बनेगा। तो आओ, आज से ही शुरू करें। अपना बैग में एक नोटबुक रखो, पुस्तकालय जाओ और नई कहानी के साथ घर लौटो।
पुस्तकालय मेरा सबसे अच्छा दोस्त है। और मुझे यकीन है, अगर तुम भी इसे अपना दोस्त बना लोगे, तो तुम्हें भी बहुत अच्छा लगेगा।