Yadi Mai Doctor Hota Nibandh: हम सब बचपन में कई सपने देखते हैं। कोई पायलट बनना चाहता है, कोई शिक्षक, तो कोई खिलाड़ी। जब भी मैं अस्पताल के सामने से गुजरता हूँ, मेरे मन में एक प्यारा सा सपना आता है। तब मैं सोचता हूँ—यदि मैं डॉक्टर होता तो कितना अच्छा होता। सफेद कोट पहनकर लोगों की सेवा करना बहुत बड़ा और अच्छा काम है। डॉक्टर लोगों को दर्द से राहत देते हैं और उनके चेहरे पर फिर से मुस्कान लाते हैं। इसलिए “यदि मैं डॉक्टर होता निबंध” लिखते समय मेरे मन में बहुत सारी भावनाएँ और विचार आते हैं।
जब मैं छोटा था, एक बार मुझे बहुत तेज बुखार हो गया था। मैं पूरे दिन बिस्तर पर लेटा रहा। माँ मेरे माथे पर ठंडी पट्टी रख रही थीं और दादी मुझे कहानी सुना रही थीं। शाम को पापा मुझे डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर अंकल ने प्यार से पूछा, “बेटा, डर तो नहीं लग रहा?” उन्होंने मुझे दवा दी और मुस्कुराकर कहा कि मैं जल्दी ठीक हो जाऊँगा। सच में, दो दिन में मैं फिर से स्कूल जाने लगा। उस दिन मुझे लगा कि डॉक्टर सच में किसी जादूगर से कम नहीं होते। तभी से मेरे मन में यह विचार आने लगा कि यदि मैं डॉक्टर होता तो मैं भी लोगों को इसी तरह ठीक करता।
स्कूल में भी कई बार छोटे-छोटे हादसे हो जाते हैं। एक दिन मेरा दोस्त रोहित खेलते समय गिर गया और उसके घुटने पर चोट लग गई। वह रोने लगा। हमारी टीचर उसे स्कूल के मेडिकल रूम में ले गईं। वहाँ डॉक्टर मैडम ने उसकी चोट साफ की और दवा लगाई। थोड़ी ही देर में रोहित शांत हो गया। उस दिन मैंने सोचा कि डॉक्टर होना कितना जरूरी और अच्छा काम है। यदि मैं डॉक्टर होता, तो मैं बच्चों की चोट तुरंत ठीक करता ताकि वे फिर से खुशी से खेल सकें।
मेरी दादी अक्सर मुझे एक कहानी सुनाती हैं। वे कहती हैं कि पुराने समय में गाँवों में डॉक्टर बहुत कम होते थे। लोग छोटी बीमारी में भी बहुत परेशान हो जाते थे। इसलिए दादी हमेशा कहती हैं कि जो लोग डॉक्टर बनते हैं, वे बहुत बड़े सेवक होते हैं। वे सिर्फ पैसा कमाने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की मदद करने के लिए काम करते हैं। जब मैं यह कहानी सुनता हूँ, तो मेरा मन और भी मजबूत हो जाता है। मैं सोचता हूँ कि यदि मैं डॉक्टर होता तो मैं गरीब लोगों का इलाज मुफ्त में करता। किसी को भी दवा के बिना दुखी नहीं रहने देता।
अगर मैं डॉक्टर बनूँगा, तो सबसे पहले मैं लोगों से प्यार से बात करूँगा। कई बार मरीज बीमारी से ज्यादा डर से परेशान होते हैं। अगर डॉक्टर मुस्कुराकर बात करे, तो मरीज का आधा दर्द वहीं खत्म हो जाता है। मैं बच्चों को दवा देते समय उन्हें कहानी सुनाऊँगा या कोई मजेदार बात करूँगा ताकि उन्हें डर न लगे। मैं अपने अस्पताल को साफ और सुंदर रखूँगा ताकि हर मरीज को अच्छा महसूस हो।
यदि मैं डॉक्टर होता, तो मैं गाँवों में भी जाकर लोगों की मदद करता। कई गाँवों में अच्छे अस्पताल नहीं होते। वहाँ के लोगों को छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी दूर शहर जाना पड़ता है। मैं गाँवों में कैंप लगाकर लोगों की जांच करता और उन्हें स्वास्थ्य के बारे में सही जानकारी देता। मैं बच्चों को बताता कि साफ पानी पीना, हाथ धोना और पौष्टिक भोजन खाना कितना जरूरी है।
आज मैं अभी एक छात्र हूँ। मुझे पता है कि डॉक्टर बनने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। मुझे मन लगाकर पढ़ाई करनी होगी और विज्ञान को अच्छे से समझना होगा। लेकिन जब भी मैं यह सोचता हूँ कि एक दिन मैं लोगों का दर्द कम कर सकूँगा, तो मुझे पढ़ाई करने की और भी प्रेरणा मिलती है।
अंत में मैं यही कहना चाहता हूँ कि यदि मैं डॉक्टर होता, तो मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य लोगों की सेवा करना होता। मैं हर मरीज को अपने परिवार के सदस्य की तरह समझता। किसी की आँखों में आँसू न रहें और हर चेहरे पर मुस्कान हो—यही मेरी सबसे बड़ी खुशी होती। इसलिए मेरा यह सपना है कि एक दिन मैं सच में डॉक्टर बनूँ और समाज के लिए कुछ अच्छा कर सकूँ।