Yadi Mai Kisan Hota Nibandh: नमस्ते मेरे प्यारे दोस्तों! आज मैं स्कूल के निबंध में आपको अपना सपना बताने जा रहा हूँ। विषय है – यदि मैं किसान होता। बचपन से ही मैं यह सोचता हूँ कि काश मैं एक अच्छा किसान बन जाऊँ। किसान हमारे देश के असली अन्नदाता हैं। वे सुबह से शाम तक खेतों में मेहनत करते हैं और हमें रोटी, चावल, दाल-सब्जी देते हैं। यदि मैं किसान होता तो मैं भी अपनी मिट्टी से प्यार करता और पूरे गाँव को खुश रखता।
जब मैं छोटा था तब मेरे नाना जी मुझे गाँव ले जाते थे। वहाँ खेतों में घूमना कितना मजा आता था! हरी-हरी घास पर दौड़ना, पेड़ों पर चढ़ना और किसान चाचाओं को काम करते देखना। दादी जी अक्सर कहती थीं, “बेटा, खेत माँ की तरह है। उसे पानी दो, प्यार दो तो वह तुम्हें फसल देगी।” उनकी कहानियाँ सुनकर मेरा मन करता कि मैं भी बड़ा होकर खेत संभालूँ। स्कूल के मेरे दोस्त राजू और प्रिया भी कहते, “यार, किसान बनना कितना अच्छा है! खेत में खेलते-खेलते काम भी हो जाता है।” हम तीनों मिलकर स्कूल के छोटे बगीचे में पौधे लगाते और रोज देखते कि कितने बड़े हो गए। वह छोटा अनुभव मुझे लगता है कि असली खेत में तो कितना बड़ा आनंद होगा।
यदि मैं किसान होता तो मेरा दिन सूरज निकलने से पहले शुरू होता। मैं जल्दी उठकर दांत साफ करता, ठंडा पानी से नहाता और माँ का बनाया गरम-गरम पराठा खाता। फिर अपने प्यारे बैलों को तैयार करता और खेत की ओर चल पड़ता। रास्ते में पक्षी चहचहाते, हवा में फूलों की खुशबू आती। खेत पहुँचकर सबसे पहले मैं मिट्टी को हाथ लगाता और उसे नमस्कार करता। फिर हल चलाकर खेत जोतता। अच्छे बीज चुनकर बोता – गेहूँ, धान, मक्का, टमाटर, आलू। हर बीज बोते समय मैं मन में प्रार्थना करता, “हे भगवान, यह अच्छी फसल दे।” रोज पानी देता, खरपतवार निकालता। जब छोटे-छोटे पौधे निकलते और हरे हो जाते तो मेरा दिल खुशी से नाच उठता। एक बार स्कूल में मैंने एक बीज लगाया था। वह बड़ा होकर सुंदर फूल बना। वैसा ही खेत में होता तो कितना अच्छा लगता!
कभी मौसम साथ नहीं देता। ज्यादा बारिश होती तो फसल डूबने लगती या सूखा पड़ जाता तो पौधे मुरझा जाते। लेकिन यदि मैं किसान होता तो मैं हिम्मत नहीं हारता। नाना जी की तरह नहर बनवाता या कुएँ से पानी खींचता। एक बार याद है, जब गाँव में सूखा पड़ा था। नाना जी ने सब बच्चों को साथ लेकर नाले साफ करवाए। हम थक गए लेकिन हँसते रहे। शाम को जब पानी बहा तो सबने तालियाँ बजाईं। फसल बच गई और सबके चेहरे पर मुस्कान आ गई। इससे मुझे सीख मिली कि मेहनत और साथ मिलकर काम करने से हर मुश्किल आसान हो जाती है।
मेरे खेत में पशु भी परिवार जैसे होते। गायें दूध देतीं, भैंसें चारा खातीं। लेकिन सबसे प्यारा मेरा छोटा कुत्ता टॉमी! वह हर सुबह मेरे साथ दौड़ता, शाम को घर लौटते समय रास्ता दिखाता। रात को खेत की रखवाली करता और अगर कोई जानवर आता तो भौंककर मुझे बुलाता। मुझे लगता जैसे टॉमी मुझे समझाता हो कि वफादारी कितनी जरूरी है। जैसे वह कभी नहीं थकता और हमेशा खुश रहता है, वैसे ही मैं भी अपनी फसल और पशुओं की देखभाल करता। मैं उन्हें अच्छा चारा देता, कभी नहीं मारता। सब जानवर खुश रहते तो खेत भी हरा-भरा और शांत रहता।
फसल पकने का समय सबसे खुशी का होता! मैं स्कूल के दोस्तों को बुलाता। राजू, प्रिया और गाँव के सारे बच्चे आ जाते। हम सब मिलकर गीत गाते-गाते फसल काटते। अनाज को सूखने के लिए फैलाते। फिर घर ले जाते। दादी जी रोटी बनातीं और कहतीं, “बेटा, तुम्हारी मेहनत का फल है यह!” मैं गाँव के गरीब परिवारों को फल, सब्जियाँ और अनाज देता ताकि कोई भूखा न सोए। एक दिन राजू ने कहा, “तुम जैसे किसान से हमें बहुत सीख मिलती है। तुम सिर्फ अपना नहीं, सबका ख्याल रखते हो।” उसकी बात सुनकर मेरा मन गर्व से भर गया।
Yadi Mai Vaigyanik Hota Nibandh: यदि मैं वैज्ञानिक होता निबंध
आजकल मैं पुरानी और नई बातें दोनों मिलाता। ट्रैक्टर से काम तेज करता लेकिन बैलों को भी आराम देता। मोबाइल पर मौसम देखता लेकिन सूर्य को प्रणाम करता। पेड़ लगाता ताकि पक्षी आएँ और हवा साफ रहे। स्कूल के बच्चे मेरे खेत में आकर घूमते और सीखते कि खेती कितनी महत्वपूर्ण है।
दोस्तों, यदि मैं किसान होता तो मेरा जीवन बहुत सार्थक होता। मैं प्रकृति का दोस्त बनता, मेहनत करता और सबके साथ प्यार बाँटता। यह निबंध लिखकर मुझे एहसास हुआ कि किसान बनना कोई छोटा सपना नहीं, बल्कि बड़ी सेवा है। हम सबको किसानों का सम्मान करना चाहिए और उनकी तरह मेहनती बनना चाहिए। यदि मैं किसान होता तो मैं पूरी दुनिया को हरा-भरा और खुशहाल बनाता। आप भी अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करो। धन्यवाद!