Yadi Mai Netaji Hota Nibandh: यदि मैं नेता होता निबंध

Yadi Mai Netaji Hota Nibandh: यदि मैं नेता होता तो मैं बहुत कुछ अच्छा करता। मैं अभी सिर्फ स्कूल जाता हूँ, दोस्तों के साथ खेलता हूँ और घर पर माँ-पापा की मदद करता हूँ। लेकिन सपने देखना तो सबको पसंद है ना? जब मैं सोचता हूँ कि यदि मैं नेता होता तो क्या-क्या करता, तो मन बहुत खुश हो जाता है।

स्कूल में मैंने एक दिन देखा था कि मेरे क्लास के राहुल के पास किताबें नहीं थीं। वह रोज़ एक ही पुरानी नोटबुक में लिखता था। मुझे बहुत दुख हुआ। यदि मैं नेता होता तो सबसे पहले मैं यह नियम बनाता कि हर बच्चे को मुफ्त किताबें, बैग और यूनिफॉर्म मिले। कोई भी बच्चा पैसे की वजह से स्कूल न छोड़े। मैं स्कूलों में बड़े-बड़े खेल के मैदान भी बनवाता, ताकि हम सब दोपहर को खूब खेल सकें और थककर भी मुस्कुराते हुए घर लौटें।

घर पर दादीजी अक्सर पुरानी कहानियाँ सुनाती हैं। वे बताती हैं कि पहले हमारे गाँव की नदी कितनी साफ थी। हम सब वहाँ नहाते थे और मछलियाँ भी दिखती थीं। अब वह नदी गंदी हो गई है। यदि मैं नेता होता तो मैं पूरे देश में नदियों को साफ करवाता। हर गाँव और शहर में पेड़ लगवाता। स्कूल के बच्चों को भी हर साल पौधे लगाने की छुट्टी देता। एक बार मेरे दोस्त अर्जुन ने कहा था, “भाई, अगर पेड़ नहीं रहे तो हम कहाँ खेलेंगे?” उसकी बात मुझे हमेशा याद रहती है। इसलिए मैं हर बच्चे को अपना एक पेड़ देता, जिसकी देखभाल वह खुद करता।

मुझे कुत्तों से बहुत प्यार है। हमारे मोहल्ले में एक छोटा सा कुत्ता है, जिसका नाम है टिंकू। वह रोज़ भूखा रहता है। जब मैं उसे रोटी देता हूँ तो वह पूँछ हिलाकर बहुत खुश हो जाता है। यदि मैं नेता होता तो मैं सारे आवारा जानवरों के लिए अच्छे आश्रय बनवाता। कोई भी कुत्ता या बिल्ली सड़क पर भूखा न सोये। मैं अस्पताल भी बनवाता जहाँ गरीब लोग मुफ्त इलाज करवा सकें। दादीजी कहती हैं, “बेटा, जो दूसरे के दुख को समझता है, वही सच्चा नेता होता है।” मैं उनकी बात मानकर सबके लिए काम करता।

Yadi Mai Pradhanacharya Hota Nibandh: यदि मैं विद्यालय का प्रधानाचार्य होता निबंध

मेरे दोस्तों के साथ भी मैं बहुत कुछ करता। स्कूल में कभी-कभी छोटी-छोटी लड़ाइयाँ हो जाती हैं। कोई किसी का खिलौना छीन लेता है। यदि मैं नेता होता तो मैं सबको सिखाता कि बाँटकर खाओ, बाँटकर खेलो। हर गाँव में एक बड़ा पार्क होता जहाँ सब बच्चे साथ खेलें। कोई अमीर-गरीब न हो। सब एक जैसे दोस्त हों। मैं टीवी पर भी अच्छी कहानियाँ दिखवाता, ताकि बच्चे सीखें कि प्यार और मदद से ही दुनिया सुंदर बनती है।

अब मैं सोचता हूँ कि अभी तो मैं नेता नहीं हूँ, लेकिन छोटे-छोटे काम करके भी मैं नेता जैसा बन सकता हूँ। घर पर माँ की मदद करना, स्कूल में दोस्त की किताब देना, गंदगी न फेंकना और कुत्ते को रोटी देना – ये सब छोटे-छोटे काम हैं, लेकिन इन्हीं से बड़ा बदलाव आता है।

यदि मैं नेता होता तो मैं देश को इतना प्यारा बना देता कि हर बच्चा मुस्कुराता रहे। लेकिन आज से ही मैं वादा करता हूँ कि मैं अच्छा इंसान बनूँगा। तुम भी अपना वादा करो। जब हम सब मिलकर छोटी-छोटी अच्छी बातें करेंगे, तो एक दिन पूरा देश खुशहाल हो जाएगा।

क्योंकि सच्चा नेता वह नहीं जो सिर्फ बड़े-बड़े भाषण दे, बल्कि वह है जो अपने छोटे से दिल से सबका ख्याल रखे।

Leave a Comment