Yadi Mai Police Officer Hota Nibandh: मेरे प्यारे दोस्तों, यदि मैं पुलिस अधिकारी होता तो निबंध लिखते समय मेरे मन में बहुत गर्व और जिम्मेदारी का भाव आता। सोचो न, मैं अभी छोटा बच्चा हूँ, स्कूल में पढ़ता हूँ, दोस्तों के साथ खेलता हूँ, घर पर मम्मी-पापा की बातें मानता हूँ, और अचानक सपना देखता हूँ – काश! मैं पुलिस वाला बन जाऊँ। खाकी वर्दी पहनकर, सीना तानकर, सड़कों पर घूमकर लोगों की मदद करता। यह सपना देखकर ही मेरी आँखें चमक जाती हैं और दिल तेज़ धड़कने लगता है।
सबसे पहले तो मैं बहुत अनुशासित होता। अभी स्कूल में हम सुबह 7 बजे उठते हैं, पर पुलिस अधिकारी तो और भी पहले तैयार हो जाता है। याद है, एक दिन मैं स्कूल के लिए देर से निकला था। पापा ने कहा, “बेटा, समय पर चलो, वरना सब कुछ गड़बड़ हो जाता है।” अगर मैं पुलिस अधिकारी होता तो यह बात मेरे लिए और भी महत्वपूर्ण होती। मैं अपनी चमकती वर्दी पहनता, जूते अच्छे से साफ करता और सीधा खड़ा होकर ड्यूटी के लिए तैयार होता। मेरे दोस्त रोहन और नेहा भी मेरे साथ होते। हम तीनों मिलकर सोचते कि कैसे अपराध रोकें और सबको सुरक्षित रखें। स्कूल के खेल के मैदान में हम “पुलिस-चोर” खेलते थे, अब असली पुलिस बनकर वही खेल सच हो जाता।
फिर मैं लोगों की मदद करता। जैसे हमारे मोहल्ले में पिछले साल एक चोरी हो गई थी। सब डर गए थे। अगर मैं पुलिस अधिकारी होता तो रात-दिन जाँच करता, चोर को पकड़ता और चोरी हुई चीजें वापस लौटाता। माँ कहती हैं, “पुलिस वाले बहादुर होते हैं, वे डरते नहीं।” उनकी बात सुनकर मैं सोचता कि पुलिस होना मतलब सिर्फ डंडा लेकर घूमना नहीं, बल्कि दिल से लोगों का साथ देना है। मैं स्कूल के बच्चों को भी सिखाता कि सड़क पर सावधानी बरतें, अजनबी से बात न करें और किसी को परेशान न होने दें। मेरी एक छोटी बहन है, वह रात को अकेले बाहर निकलती है तो डर जाती है। मैं चाहता कि कोई भी बच्चा डरे नहीं।
ट्रैफिक का बहुत ख्याल रखता। हमारे शहर में बहुत गाड़ियाँ हैं। कभी-कभी जाम लग जाता है। बच्चे स्कूल जाते समय देर हो जाती है। अगर मैं पुलिस अधिकारी होता तो अच्छे से ट्रैफिक कंट्रोल करता। सिग्नल पर खड़ा होकर बच्चों को सेफ्टी सिखाता। जैसे “लाल बत्ती पर रुको, हरी पर चलो।” मेरे दोस्त अंकित कहता है, “अगर पुलिस वाले अच्छे से ट्रैफिक रोकें तो कोई एक्सीडेंट नहीं होगा।” मैं उसके विचार को सच करता।
स्कूल में जब हम स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराते हैं तो मुझे बहुत गर्व होता है। अगर मैं पुलिस अधिकारी होता तो 15 अगस्त और 26 जनवरी पर परेड में शामिल होता। मेरे छोटे भाई-बहन मुझे देखकर खुश होते। “वाह! हमारा भैया पुलिस वाला है!” कहकर वे ताली बजाते। मैं उन्हें बताता कि पुलिस देश की रक्षा करती है, लेकिन सबसे पहले बच्चों और औरतों की सुरक्षा करती है। घर पर माँ के हाथ का खाना लेकर मैं अपने साथी पुलिस वालों के साथ बाँटता। ठीक वैसे ही जैसे स्कूल में हम टिफिन शेयर करते हैं। पुलिस भी एक बड़ा परिवार होती है। सब एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं।
एक बार दादा जी ने बताया कि जब वे छोटे थे तब पुलिस वाले ने उनके गाँव में आग लगने पर सबको बचाया था। दादा जी कहते थे, “वे लोग अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों को बचाते हैं।” उस कहानी को सुनकर मैं सोचता, काश मैं भी वैसा बन सकूँ। अगर मैं पुलिस अधिकारी होता तो स्कूल के बच्चों को भी सिखाता कि छोटी-छोटी बातों में ईमानदारी रखो। जैसे किसी का पेन गिर जाए तो उठाकर दे दो, या दोस्त के साथ झूठ न बोलो। ये छोटी आदतें ही हमें अच्छा इंसान और अच्छा पुलिस अधिकारी बनाती हैं।
Yadi Mai Pradhanmantri Hota Nibandh: यदि मैं प्रधानमंत्री होता निबंध
दोस्तों, पुलिस अधिकारी बनना मतलब सिर्फ वर्दी पहनना नहीं। यह दिल की बात है। पुलिस वाला सच बोलता है, कभी डरता नहीं, हमेशा मदद के लिए तैयार रहता है। मैं भी रोज स्कूल जाते समय यही सोचता हूँ कि चाहे मैं डॉक्टर बनूँ, टीचर बनूँ या पुलिस वाला, लेकिन अपने आस-पास के लोगों की मदद जरूर करूँगा।
अंत में मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि यदि मैं पुलिस अधिकारी होता तो निबंध खत्म करते समय भी मुस्कुराता। क्योंकि पुलिस बनकर मैं न सिर्फ अपराध रोकता, बल्कि हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाता। तुम भी सोचो न, अगर तुम पुलिस वाले होते तो क्या-क्या करते? आज से ही स्कूल में नियम मानो, दोस्तों की मदद करो, सड़क पर सावधानी बरतो। क्योंकि असली पुलिस वाला वही है जो सबका ख्याल रखता है और देश को सुरक्षित बनाता है।